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2009 के राजस्थान टॉपर दोरासर के जितेंद्र शर्मा ने क्लियर की यूपीएससी एग्जाम

झुंझुनूं. 2009 में राजस्थान बोर्ड टॉपर रहे जितेंद्र शर्मा ने यूपीएससी एग्जाम क्लियर कर लिया है। उनकी आॅल इंडिया पर 447वीं रैंक आई है। झुंझुनूं के दोरासर में रहने वाले जितेंद्र शर्मा के घर में इस सफलता के बाद खुशी का माहौल है। जितेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने 10वीं तक की पढाई गांव के सरकारी स्कूल में की। क्योंकि उनके पिता बाहर छोटी सी नौकरी किया करते थे। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढाई सीकर की प्रिंस स्कूल से की। 12वीं कॉमर्स में उन्होंने 2009 में पूरे राजस्थान में टॉप करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया था। उनका सपना था कि वे आईएएस बनें। लेकिन कहीं ना कहीं आर्थिक परेशानी सामने आ रही थी। क्योंकि जिस साल उन्होंने 10वीं पास की थी। उसके आस—पास ही उनके पिता रमेश शर्मा का निधन हो गया था। इसलिए उन्होंने अपने इस सपने को साइड में रखा और सीपीटी की तैयारी शुरू की। जिसमें भी उन्होंने आॅल इंडिया पर 11वीं रैंक हासिल कीफ वहीं सीए इंटर में आॅल इंडिया पर 26वीं रैंक और सीए फाइनल में आॅल इंडिया में चौथी रैंक हासिल कर गुड़गांवा और बैंगलोर की कंपनियों में चार साल नौकरी की। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ 2018 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में इस बार सफलता हासिल की। जितेंद्र शर्मा की मां उर्मिला देवी बताती है कि उन्हें आज भी नहीं पता कि उनका बेटा क्या बना है। लेकिन उसकी सफलता के लिए उन्होंने भगवान शिव के आगे अर्जी लगाई थी। जो आज सफल हो गई है। जितेंद्र शर्मा की इस सफलता की गांव के लोगों में खुशी हैं। पूर्व सरपंच अर्जुन महला समेत ग्रामीणों ने घर पहुंचकर जितेंद्र का मुंह मीठा करवाया और बधाई दी।
हर परीक्षा में अव्वल रहा है जितेंद्र
जितेंद्र शर्मा ने 10वीं तक की पढाई गांव की स्कूल में की। उस वक्त की भी 2007 में उसने 88 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं का एग्जाम क्लियर किया था। इसके बाद 12वीं में उसने वाणिज्य संकाय से पूरे राजस्थान को टॉप किया थाा। सीपीटी के एग्जाम में आॅल इंडिया पर 11वीं रैंक हासिल की। सीपीटी इंटर में उन्होंने आॅल इंडिया पर 26वीं रैंक हासिल की और सीए फाइनल में आॅल इंडिया में चौथी रैंक हासिल की।
पैसे की तंगी के चलते दिल्ली छोड़ घर से की पढाई
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि 2018 से उन्होंने अपने स्कूल समय के सपने को पूरा करने के लिए कोशिश शुरू की। 2019 में उन्होंने दिल्ली में रहकर पढाई की और इंटरव्यू तक क्वालीफाई किया। लेकिन सफलता हासिल नहीं लगी। कुछ नंबरों से एग्जाम क्लियर होने से रह गया। इसके बाद ऐसी स्थिति नहीं थी कि वह दिल्ली रहकर पढाई कर पाता। इसलिए गांव दोरासर आ गया और गांव में ही पढाई कर 2020 में एग्जाम दिया। लेकिन प्री भी क्लियर नहीं हो पाया। तब बहुत हताश हुआ। लेकिन हार नहीं मानी। उसने 2021 में फिर से पढाई की और दोरासर गांव में ही रहते हुए पढाई की। लेकिन इस बार उसने सफलता हासिल कर ली।
भाई अरूण है नेवी में, खुद भी बचाता था पैसे
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि जब पिता का निधन हुआ तो परिवार काफी दिक्कतों में था। उनका मूल गांव झुंझुनूं के नवलगढ़ के पास कारी है। लेकिन पिता के निधन के बाद उन्हें वह गांव छोड़ना पड़ा और वह अपने ननिहाल दोरासर आकर परिवार के साथ रहने लगा। बड़े भाई अरूण शर्मा ने भी दिनरात पढाई कर नेवी में नौकरी प्राप्त की। इसके बाद परिवार की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। उसे भी अपने सिविल सर्विसेज के सपने पूरे करने थे। लेकिन परिवार की स्थिति के आगे उसने अपने सपनों को साइड में रखा। पहले सीए बना और चार साल तक नौकरी की। नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह से ना केवल वह परिवार में सहयोग करता। बल्कि चार साल तक थोड़ा थोड़ा पैसा अपने सपनों को पूरा करने के लिए भी बचाता था। चार साल बाद उसने अपने भाई अरूण शर्मा के सहयोग और मोटिवेशन से फिर पढाई शुरू की और तीन बार के प्रयास में सफलता हासिल की।
डिलिट किए सोशल मीडिया अकाउंट
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि 2018 से पहले उसके लगभग सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर अकाउंट थे। लेकिन जिस दिन उसने तैयारी शुरू की। उसी दिन सभी को डिलिट कर दिया। यू ट्यूब को कभी भी कंटेंट की जानकारी लेने के लिए यूज करता था। लेकिन वो भी केवल नाम मात्र का। व्हाट्स एप तो जितेंद्र शर्मा ने करीब चार साल बाद सोमवार को परिणाम में सफलता हासिल होने के बाद डाउनलोड किया है।
रात को ढाई तीन बजे खाना खिलाया
जितेंद्र शर्मा की मां उर्मिला शर्मा पांचवीं तक पढी है। उसे अपने बेटों की पढाई और नौकरी के बारे में कुछ नहीं पता। बस वह रामायण और शिव पुराण ही पढने में विश्वास रखती है। उर्मिला शर्मा ने बताया कि दो साल से जब जितेंद्र घर पर पढाई कर रहा था। उसको पानी पिलाने से लेकर खाना खिलाने तक ध्यान रखा। बार—बार जाकर पानी पिलाकर आती थी। वहीं रात को ढाई—तीन बजे तक जितेंद्र पढाई करता। उसके बाद उसे गर्म खाना खिलाकर सुलाती थी। भगवान शिव में आस्था रखने वाली उर्मिला शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस बार ​भगवान शिव का अभिषेक भी करवाया था कि उसके बेटे को सफल करना भगवान। यदि सफलता मिलेगी तो हर साल अभिषेक करवाएगी। रविवार को ही उन्होंने अपने घर के सामने स्थित उनके पिता द्वारा स्थापित शिवालय में भगवान को नई ड्रेस मन्नत मांगते हुए पहनाई थी। सफलता के बाद बोली, भगवान ने मेरी सुन ली।
गोल पर ध्यान रखा हमेशा जितेंद्र ने
जितेंद्र शर्मा के स्कूल के साथी फतेहपुर सीकर के रहने वाले रवि वर्मा ने बताया कि जितेंद्र शर्मा ने हमेशा अपने गोल पर ध्यान रखा। रवि वर्मा ने बताया कि जब पहली और दूसरी बार जितेंद्र असफल हुआ तो वह उसके साथ था। परिणाम वाले दिन वह जितेंद्र के साथ था। ताकि असफल हो तो जितेंद्र को हताशा हो तो वह संबल दे सके और सफल हो तो पहली बधाई अपने दोस्त को वो ही दे सके। रवि वर्मा ने बताया कि स्कूल से लेकर सीए बनने तक हम साथ थे। रवि वर्मा भी सीए है और दोनों दोस्तों ने जॉब भी साथ साथ किया है।

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