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हद है! कोर्ट बुलाता रहा, एसई आए नहीं

लोक अदालत ने लगाया एसई पर एक हजार रूपए का लगाया जुर्माना

झुंझुनूं। अब तक आपने बिजली पानी के विभागों के अधिकारियों की हठधर्मिता देखी और सुनी होगी। क्योंकि उनसे सीधा वास्ता आमजनता का पड़ता है। लेकिन इनसे कहीं भी कम पीडब्लूडी नहीं है। जी, हां कोर्ट पीडब्लूडी एसई को बुलाता रहा। लेकिन उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ा और बार—बार बुलावे पर भी एसई तो क्या, उनका कोई नुमाइंदा तक कोर्ट में नहीं पहुंचा। अब कोर्ट ने ना केवल एक हजार रूपए का जुर्माना एसई पर लगाया है। बल्कि उन्हें आदेश दिए है कि एक महीने में जिले में घटिया क्वालिटी के लगाए गए प्लास्टिक के ब्रेकर हटाकर उनकी जगह वैज्ञानिक रूप से स्पीड ब्रेकर बनवाया जाए। दरअसल स्थायी एवं अनवरत लोक अदालत में अंशुमान सिंह शेखावत एडवोकेट निवासी रीको झुंझुनूं तथा जयप्रकाश झाझड़िया निवासी भड़ौंदा कलां ने एक परिवार अधीक्षण अभियंता पीडब्लूडी झुंझुनूं तथा राजस्थान सरकार के खिलाफ परिवाद दिया था कि पीडब्लूडी ने जिले में कई स्थानों पर प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर लगाए है। जिनका उपरी हिस्सा टूट गया है। वहीं उनके लगाई गई कीलें अभी भी सड़क पर लगी हुई है। जिनसे हादसे होने की संभावना बनी रहती है। इन कीलों से टायर फटने और टायर फटने से तेज गति का वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। साथ ही जिले में कई जगहों पर अनावश्यक स्पीड ब्रेकर बना दिए गए है। वहीं कई जगहों पर बिना मानकों के इतने ऊंचे ऊंचे स्पीड ब्रेकर बना दिए। जिनके क्रॉस करके छोटी गाड़ियां निकल नहीं पाती। इसके साथ—साथ कई जगहों पर बिजली के पाल सड़कों पर डालकर स्पीड ब्रेकर बनाए गए है। स्पीड ब्रेकरों पर संकेतकों का भी अभाव है। इन समस्याओं को लेकर पेश किए गए परिवाद पर लोक अदालत ने पीडब्लूडी एसई को तलब किया। लेकिन पीडब्लूडी अधिकारी तलब करने पर अपना पक्ष रखने के लिए पेश नहीं हुए। इसके बाद नौ जून को व्यक्तिगत रूप से स्वयं उपस्थित होने तथा मौका रिपोर्ट साथ लाने के लिए नोटिस दिया गया। लेकिन उसके बावजूद ना तो एसई और ना ही उनका कोई प्रतिनिधि लोक अदालत में पेश हुआ। जिस पर लोक अदालत के अध्यक्ष जिला जज हेमंत कुमार जैन, सदस्य एडवोकेट जैनेंद्र वैष्णव तथा बूंटीराम मोटासरा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह के हालात से पीडब्लूडी और जिला प्रशासन का रवैया उचित नहीं कहा जा सकता।
लोक अदालत ने दिया फैसला, एक महीने में कार्रवाई हो
इन सब तथ्यों के बाद लोक अदालत ने फैसला दिया है कि जो स्पीड ब्रेकर उखड़े हुए है। उनको निकाला जाए। घटिया क्वालिटी के स्पीड ब्रेकरों को तुरंत बदलवाया जाए। अनावश्यक ब्रेकरों को हटवाया जाए। जहां स्पीड ब्रेकर लगाना आवश्यक है। वहां पर वैज्ञानिक रूप से तय मापदंडों में स्पीड ब्रेकर बनाया जाए। साथ ही संकेतक लगाया जाए। स्पीड ब्रेकर बनाने से पहले सुरक्षा प्रकोष्ठ स्थापित हो। जिसके अंतर्गत स्पीड ब्रेकरों का निर्माण हो। स्पीड ब्रेकरों पर जेब्रा लाइन आवश्यक रूप से हो। एक महीने में यह काम पूरा करने के आदेश दिए है। यदि ऐसा विभाग नहीं करता है तो परिवादी कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई कर सकेंगे।
तीन—तीन फुट के स्लॉप में बनाए ब्रेकर
लोक अदालत ने आदेश दिए है कि खेतड़ी—सिंघाना राजमार्ग 13 एवं झुंझुनूं जिले में पीडब्लूडी द्वारा पोषित की जा रही अन्य सभी सड़कों पर 15 दिन के भीतर टूटे हुए डिवाइडर के पश्चात बची हुई लोहे की कीलों को तुरंत प्रभाव से निकालें। वहां पर सीमेंट कंकरीट अथवा डामर की व्यवस्थित वैज्ञानिक रूप से स्पीड ब्रेकर निर्माण करें जो लगभग तीन फुट तक लंबाई में स्लॉप बनाते हुए और वापिस तीन फुट की लंबाई में स्लॉप उतारते हुए बनाए जाए। उस पर गहरे सफेद रंग की जेब्रा लाइन भी की जाए।
जिला स्तर पर गठित हो सुरक्षा प्रकोष्ठ
लोक अदालत ने अपने फैसले में लिखा है कि जिले में अनेकोनेक जगह पर टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों पर भी न्यायिक संज्ञान लेना जरूरी है। साथ ही आदेश दिया कि जिला कलेक्टर पीडब्लूडी के मुख्य अभियंता के साथ बैठक कर स्पीड ब्रेकर के बारे में एक सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना करें। जिले में सभी जगह व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप से स्पीड ब्रेकर बनाया जए। प्लास्टिक के जगह—जगह स्पीडर ब्रेकर टूट गए है। उनकी कीलों को भी तत्काल हटाया जाए। आदेशों में जिला कलेक्टर और जिला न्यायाधीश के आवास के सामने स्थित स्पीड ब्रेकर का भी हवाला दिया गया है। जिसके बारे में लिखा गया है कि जिला कलेक्टर आवास तथा जिला न्यायाधीश आवास के सामने जो स्पीड ब्रेकर है। उस पर भी किसी तरह की जेब्रा लाइन नहीं है। उस पर भी वाहन अनेक बार उछल जाते है।

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